Thursday, 16 November 2017

House Building Advance (HBA) Rule - 2017 / गृह निर्माण अग्रिम नियम (एचबीए) — 2017

आई—17011/11(4)/2016—एच—III
भारत सरकार
आवासन और शहरी कार्य मन्त्रालय
आवास—III अनुभाग


निर्माण भवन, नई दिल्ली
दिनांक: 09.11.2017


कार्यालय ज्ञापन


विषय: गृह निर्माण अग्रिम नियम (एचबीए) — 2017

उपर्युक्त विषय पर वर्तमान नियमों के अधिक्रमण में गृह निर्माण अग्रिम नियम निम्नवत हैं:—

1. प्रस्तावना

गृह निर्माण अग्रिम की अनुमति केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (पूर्ववर्ती शहरी विकास मंत्रालय) द्वारा समय—समय पर निर्धारित नियमों और विनियमों के अनुसार विनियमित की जाती है। ये नियम निम्नवत हैं:

2. प्रयोजन

गृह निर्माण अग्रिम (एचबीए) निम्नलिखित प्रयोजन में से केवल एक प्रयोजन के लिए कर्मचारी हेतु स्वीकार्य है:—

i. कर्मचारी या कर्मचारी और कर्मचारी की पत्नी/पति के संयुक्त रूप से / व्यक्तिगत रूप से स्वामित्व वाले प्लॉट पर नए मकान का निर्माण करना।

ii. प्लॉट खरीदना और उस पर मकान का निर्माण करना।

iii. सहकारी योजनाओं के तहत प्लॉट खरीदना और उस प्लॉट पर मकान / फलैट का निर्माण करना या सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज की सदस्यता के माध्यम से मकान खरीदना।

iv. दिल्ली बंगलौर, यूपी, लखनउ आदि की स्व—वित्तपोषण योजनाओं के तहत मकान खरीदना / निर्माण करना।

v. आवास बोर्डों, विकास प्राधिकरणों और अन्य सांविधिक या अ​र्ध—सरकारी निकायों और निजी पक्षकारों अर्थात् पंजीकृत बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स, हाउस बिल्डिंग सोसायटियों आदि से नए निर्मित गृह/फ्लैट की सीधी खरीद, लेकिन नि​जी व्यक्तियों से नहीं।

vi. कर्मचारी या कर्मचारी द्वारा संयुक्त रूप से पति या पत्नी के स्वामित्वाधीन मौजूद गृह में आवास परिसर का विस्तार। मौजूदा संरचना की कुल लागत (भूमि की लागत को छोड़कर) और प्रस्तावित संवर्धन इन नियमों के ​तहत निर्धारित लागत सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए।

vii. कतिपय शर्तों के अध्यधीन, किसी सरकार अथवा हडको अथवा नि​जी स्रोतों से लिए गए ऋण अथवा ​अग्रिम की चुकौती चाहे निर्माण कार्य शुरू हो गया हो।

viii. वर्तमान कर्मचारी जिन्होंने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थओं से गृह ऋण लिया है, उनको वर्तमान शर्तों को पूरा करने के अध्यधीन, इस स्कीम में आने की अनुमति है।

ix. किसी रिहायशी कॉलोनी में दुकान—सह—रिहायशी प्लॉट के लिए निर्धारित प्लॉट पर ही भवन के रिहायशी भाग का निर्माण करें, जो निर्धारित लागत सीमा में हो।

3. पात्रता

i. सभी स्थायी सरकारी कर्मचारी।

ii. न्यूनतम 5 वर्ष की निरन्तर सेवा वाले सभी अन्य कर्मचारी, बशर्ते कि वे किसी राज्य सरकार के अधीन कोई स्थायी नियुक्ति न रखते हों और स्वीकृति अधिकारी मकान के बनाने तथा मोर्गेज किए जाने तक उनके सेवा में बने रहने के बारे में आश्वस्त हैं।

iii. केन्द्रीय सरकार के अंतर्गत सेवा के लिए प्रतिनियुक्त अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य / कम्पनी / एसोसिएशन / नि​गमित अथवा अनिगमित व्यक्तियों की निकाय, जो केन्द्रीय सरकार अथवा किसी अंतर्राष्ट्रीय संगठन, और सरकार अथवा नि​जी निकाय द्वारा नियंत्रित न किए जाने वाली स्वायत्तशासी निकाय द्वारा पूर्ण अथवा आंशिक रूप से स्वामित्व में है अथवा नियंत्रित है।

iv. संघ राज्य क्षेत्रों और पूर्वोत्तर फ्रंटियर एजेंसी के कार्मिक।

v. आकाशवाणी का स्टाफ/कलाकार जो उपर 2 में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करते हैं और विद्यमान नियमों के अनुसार वर्धित आयु में छूट तक दीर्घ अवधि कॉन्ट्रेक्ट पर नियुक्त हैं।

vi. मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 द्वारा शासित केंद्र सरकार के कर्मचारी।

vii. अन्य विभाग अथवा विदेश सेवा में प्रतिनियुक्ति केंद्र सरकार के कर्मचारी। ऐसे मामलों का निपटान मूल विभाग के कार्यालय अध्यक्ष द्वारा किया जाना है।

viii. पूर्व कर्मचारी और केन्द्र सरकार के निलम्बित कर्मचारियों के संबंध में पात्रता की शर्तों के विद्यमान नियम अपरिवर्तित हैं।

टिप्पणी: उन मामलों में जहां पति—पत्नी दोनों केन्द्र सरकार के कर्मचारी हैं, दोनों ही गृह निर्माण अग्रिम के लिए पात्र हैं, ऐसा अग्रिम संयुक्त रूप से/ पृथक रूप से दोनों के लिए अनुमत्य होगा।

4. लागत की अधिकतम सीमा शर्तें —

i. निर्मित किए जाने वाले/खरीदे जाने वाले मकान की लागत (भू—खण्ड की लागत के सिवाय) अधिकतम 1 करोड़ रूपए (एक करोड़ रूपए) मात्र के अध्यधीन कर्मचारी के मूल वेतन के 139 गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए। व्यक्तिगत मामलों में, यदि प्रशासनिक मंत्रालय मामले के पहलुओं से संतुष्ट है तो विभागाध्यक्ष द्वारा लागत की ​अधिकतम सीमा में अधिकतम 25% तक राहत दी जा सकती है।

5. अग्रिम धनराशि

i. सरकारी कर्मचारी को उसके संपूर्ण कार्यकाल में केवल एक ​अग्रिम की स्वीकृति दी जाएगी।

ii. अ​ग्रिम की अधिकतम राशि निम्नवत होगी: 

(क)  34 महीने का मूल वेतन जिसकी अधिकतम सीमा केवल 25 लाख (पच्चीस लाख रू0) अथवा मकान/फ्लैट की लागत अथवा चुकौती क्षमता के अनुसार धनराशि जो भी नए गृह/फ्लैट के नव—निर्माण/खरीद के लिए कम हो, होगी।

(ख)  मौजूदा आवास के विस्तार के लिए, गृह निर्माण अग्रिम की राशि 34 महीने के मूल वेतन तक सीमित होगी जिसकी अधिकतम सीमा केवल 10 लाख रूo (दस लाख रूo) अथवा विस्तार की लागत अथवा चुकौती क्षमता के अनुसार धनराशि जो भी कम हो, होगी।

(ग)  ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण के मामले में अग्रिम की राशि भूमि की वास्तविक लागत तथा आवास के निर्माण अथवा रह रहे आवास के विस्तार की लागत के 80% तक सीमित होगी। इसमें राहत दी जा सकती है और 100% स्वीकृति दी जा सकती है यदि विभागाध्यक्ष प्रमाणित करता है कि संबंधित ग्रामीण क्षेत्र कस्बे या शहर की परिधि के भीतर आता है।

6. चुकौती क्षमता

स्वीकार्य ऋण राशि की गणना के प्रयोजन हेतु, केन्द्र सरकार कर्मचारी की चुकौती क्षमता का आकलन इस प्रकार किया जाएगा:



क)
कर्मचारी के 20 वर्ष पश्‍चात सेवा-न‍िवृत्‍त होने वाले मामले में
मूल वेतन का 40%
ख)
कर्मचारी के 10 वर्ष पश्‍चात क‍िन्‍तु 20 वर्ष से कम समय में सेवा-न‍िवृत्‍त होने के मामले में। 
मूल वेतन के 40% तक। डीसीआर ग्रेच्‍यूटी के 65% को भी समायोजित क‍िया जा सकता है।
ग)
कर्मचारी के 10 वर्ष के भीतर सेवा-न‍िवृत्‍त होने के मामले में।
मूल वेतन के 50% तक।  डीसीआर ग्रेच्‍यूटी के 75% को समायोज‍ित क‍िया जा सकता है।

7. ब्याज की स्वीकार्य दर तथा गृह निर्माण अग्रिम की वसूली की पद्धति —

i. वित्त वर्ष 2017—18 से गृह निर्माण अग्रिम पर ब्याज दर 8.50% होगी। ब्याज दर की समीक्षा प्रत्येक तीन वर्ष में की जाएगी तथा बदली गई ब्याज दर को वित्त वर्ष के शुरू में वित्त मंत्रालय के साथ परामर्श करके अधिसूचित किया जाएगा।

ii. एचबीए की वसूली की पद्धति मूलधन वसूली की मौजूदा पद्धति के अनुसार जारी रहेगी जो पहले 15 वर्षों में वसूल किया जाएगा जिसकी किस्तें 180 मासिक किस्तों से अधिक नहीं होगी और उसके बाद अगले पांच वर्षों में ब्याज वसूल किया जाएगा जिसकी अवधि 60 मासिक किस्तों से अधिक नहीं होगी। पहली किस्त के भुगतान की तारीख से अग्रिम पर साधारण ब्याज लिया जाएगा।

iii. ब्याज दर में परिवर्तन की स्थिति में कर्मचारी द्वारा विभिन्न वित्तीय वर्षों में लिए गए एचबीए की दूसरी अथवा बाद की खेप/किस्तों के मामले में, ब्याज की लागू दर उस वर्ष की होगी जिस वर्ष एचबीए को मंजूरी दी गई ​थी।
टिप्पणी : गृह निर्माण अग्रिम की मंजूरी के दौरान निर्धारित दर से उपर 2.5% दो बिंदु पांच प्रतिशत पर उच्च ब्याज दर को जोड़ने का नियम, जैसा कि नीचे दिया गया है, वापस ले लिया है।
''स्वीकृति में इस शर्त के साथ अनुसूचित दरों से 2.5% अधिक ब्याज दर की व्यवस्था होनी चाहिए कि राशि की वसूली से सम्बन्धित शर्तों सहित स्वीकृति से सम्बद्ध शर्तों को सक्षम प्राधिकारी की सन्तुष्टि के अनुसार पुर्णतया पूरा किया जाता है, तो 2.5% की सीमा तक ब्याज दर में छूट दी जाएगी ''।

8. वितरण

i. जैसे ही आवेदक निर्धारित प्रपत्र में एक करार करता है, निर्मित घर की खरीद के लिए अग्रिम का भुगतान एकमुश्त राशि में किया जाएगा। कर्मचारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अग्रिम की निकासी के तीन महीनों के भीतर मकान खरीदें और सरकार को मोर्गेज करें।

ii. नए फ्लैट की खरीद/निर्माण का अग्रिम विभाग प्रमुख के विवेक पर एकमुश्त या सुविधाजनक किस्तों में भुगतान किया जा सकता है। कर्मचारी के अग्रिम/अग्रिम की पहली किस्त का भुगतान किए जाने से पहले निर्धारित फार्म में करार करना चाहिए। कर्मचारी द्वारा निकाली गई राशि का उपयोग एक महीने के भीतर फ्लैट की खरीद/निर्माण के लिए किया जाना चाहिए।

iii. आवास परिसर आदि के निर्माण/विस्तार के लिए अग्रिम, प्रत्येक 50% की दो किस्तों में देय होगा। पहली किस्त का भुगतान प्लॉट और प्रस्तावित घर/मौजूदा मकान के मोर्गेज के बाद और शेष राशि का भुगतान निर्माण कार्य प्लिंथ स्तर तक पहुंचने के बाद किया जाएगा।

iv. घर की उपरी मंजिल पर किए जाने वाले विस्तार के लिए अग्रिम, दो किस्तों में वितरित किया जाएगा, पहली किस्त बंधक विलेख निष्पादन करने पर और दूसरी किस्त निर्माण स्थल के छत स्तर तक पहुंचने पर।

v. प्लॉट खरीदने और गृह निर्माण के लिए अग्रिम के मामले में, अग्रिम नीचे दिए अनुसार वितरित किया जाएगा:

क) एक मंजिला घर: प्रतिभूति बांड प्रस्तुत करने र निर्धारित फार्म में करार क निष्पादन करने के बाद, प्लॉट की खरीद के लिए अग्रिम या वास्तविक लागत की 40% राशि वितरित की जाएगी। शेष राशि दो समान किस्तों में वितरित की जाएगी, पहली मोर्गेज का निष्पादन करने के बाद तथा दूसरी निर्माण कार्य के कुरसी स्तर पर पहुंचने के बाद जारी की जाएगी।

ख) दो मंजिला मकान: करार होने के पश्चात प्लॉट की लागत का 30% अग्रिम वितरित किया जाएगा। शेष राशि का दो समान किस्तों में वितरित किया जाएगा, पहले बंधक विलेख को निष्पादित करने पर और दूसरा निर्माण कार्य कुरसी स्तर तक पहुचने पर।


9. मोर्गेज और द्वितीय मोर्गेज की व्यवस्था

क) भातर के राष्ट्रपति की ओर से मकान को बंधक रखा जाएगा। तथापि, यदि कर्मचारी, मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों से घर/भूखंड या फ्लैट की शेष राशि को पूरा करने के लिए दूसरे मोर्गेज की इच्छा रखता है, तो वह उसी की घोषणा कर सकता है और एचबीए के लिए आवेदन करते समय एनओसी के लिए आवेदन कर सकता है। एचबीए के स्वीकृति आदेश के साथ दूसरे मोर्गेज के लिए एनओसी दिया जाएगा। एचबीए से कुल ऋण और अन्य सभी स्रोतों से ऋण घर की अधिकतम लागत से अधिक नहीं हो सकता है जैसा कि उपरोक्त पैरा 4 में परिभाषित किया गया है।


ख) यदि पति/पत्नी दोनों में संयुक्त रूप से एचबीए का लाभ उठाया है,

i. संपत्ति के संबंध में एचबीए बंधक कागज, बीमा कागजात और अन्य कागजात उनकी पसंद के ऋण स्वीकृति अधिकारियों में से एक को जमा किए जाएंगे।

ii. द्वितीय ऋण स्वीकृति प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

iii. भारत के राष्ट्रपति के नाम में बंधक संपत्ति का हस्तांतरण, निर्धारित फार्म में केन्द्रीय सरकार के संबंधित कर्मचारी (या उनके उत्तराधिकारियों के नाम में, जैसा कि मामला हो) को तब किया जाएगा, जब ब्याज के साथ मिलकर पूर्ण अग्रिम चुका दी गई हो और द्वितीय ऋण स्वीकृति प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत एचबीए ऋण के संबंध में अना​पत्ति प्रमाण—पत्र प्राप्त कर लिया हो।


10. बीमा

क) मकान/फ्लैट की खरीद/खरीद के तत्काल बाद, कर्मचारी बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) द्वारा अनुमोदित मान्यताप्राप्त संस्थानों के साथ अग्रिम राशि के बराबर राशि का घर का बीमा करेगा, और इसे आग, बाढ़ और बिजली से होने वाली क्षति के खिलाफ तब तक सुरक्षित रखेगा जब तक कि अग्रिम ब्याज के साथ चुकाई न जाए और विभाग के प्रमुख एचओडी के पास पॉलिसी दस्तावेजों को जमा करेगा। बीमा का नवीकरण हर साल किया जाएगा और प्रीमियम रसीदें नियमित रूप से विभाग प्रमुख के निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करनी होंगी।

ख) ब्याज की मौजूदा दर से ​अधिक 2% का दंड स्वरूप ब्याज उस अवधि के लिए कर्मचारी से वसूल किया जाएगा, जिस अवधि में उस मकान का बीमा नहीं हुआ है।


11. प्रवसन

वर्तमान गृह निर्माण अग्रिम लाभार्थी जो प्रवसन करना चाहते हैं उनके लिए संशोधित गृह निर्माण अग्रिम के लिए माइग्रेशन हेतु शीघ्र ही पृथक आदेश जारी किया जाएगा।


12. वर्तमान नियम

गृह निर्माण अग्रिम नियमो के पहले संस्करण में संगत खंडों में उपर्युक्त परिवर्तनों के अतिरिक्त, अन्य सभी वर्तमान नियम लागू रहेंगे।


13. जहां तक सम्बन्ध्ति भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा विभाग में कार्यरत व्यक्तियों का सम्बन्ध है यह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के परामर्श से जारी किया जाता है।


14. यह इसके जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा।

(शैलेन्द्र विक्रम सिंह)
निदेशक
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
दूरभाष : 23062798


सेवा में,

मानक वितरण सूची के अनुसार भारत सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग।

प्रति— मानक पृष्ठांकन सूची के अनुसार सीएंडएजी और यू.पी.एस.सी आदि।

सूचनार्थ प्रति— आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के निजी सचिव, सचिव (आवासन और शहरी कार्य) के प्रधान स्टाफ अधिकारी/संयुक्त सचिव एवं वित्त सलाहकार के प्रधान निजि सचिव, बजट प्रभाग और अवर सचिव (प्रशा0), आवासन और शहरी कार्य मन्त्रालय, नई दिल्ली।

[आवासन और शहरी कार्य मन्त्रालय का पत्रांक आई—17011/11(4)/2016—एच—III ​दिनांक: 09.11.2017 के लिए नीचे इमेज पर क्लिक करें]
https://www.facebook.com/groups/416962422036428/472574613141875/

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