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7वां वेतन आयोग: न्यूनतम वेतन में 3 हज़ार तक की हो सकती है बढ़ोत्तरी - सरकार जनवरी से बढ़ी हुई सैलरी का कर सकती है ऐलान।

7वां वेतन आयोग: न्यूनतम वेतन में 3 हज़ार तक की हो सकती है बढ़ोत्तरी - सरकार जनवरी से बढ़ी हुई सैलरी का कर सकती है ऐलान। 

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जानिए कब से मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी 

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अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए जनवरी 2019 से सिफ़ारिशें लागू हो सकती हैं। न्यूनतम वेतन में भी 3 हज़ार रुपये तक का इजाफा किया जा सकता है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि सरकारी कर्मचारियों को इसी वित्त वर्ष से बढ़ी हुई सैलरी मिल सकती है. वह भी वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा. सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार जनवरी से बढ़ी हुई सैलरी का ऐलान कर सकती है. हालांकि, यह घोषणा कब होगी इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. लेकिन, अगले साल होने वाले आम चुनाव को देखते हुए जनवरी 2019 से सिफारिशें लागू हो सकती हैं. न्यूनतम वेतन में भी 3 हजार रुपए तक का इजाफा किया जा सकता है.
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कब मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

वित्त मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि अगले तीन महीने सरकार को आर्थिक दबाव कम होने का भरोसा है. यही वजह है कि वो चुनाव से पहले ही केंद्रीय कर्मचारियों के लिए घोषणा कर सकती है. सूत्रों का कहना है कि यह संभव है कि सरकार इसका ऐलान दिसंबर के अंत तक कर दे. लेकिन, सिफारिशें जनवरी 2019 से ही लागू होंगी. अभी इसकी तारीख तय नहीं है. दावा यह भी है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मिनिमम पे स्केल में 3000 रुपए की बढ़ोतरी हो सकती है. यानी 18,000 रुपए के बजाय अब मिनिमम बेसिक पे 21,000 रुपए हो सकती है.

बढ़ सकता है फिटमेंट फैक्टर

फिटमेंट फैक्टर को भी 2.57 गुना से बढ़ाकर 3 गुना किया जा सकता है. हालांकि, केंद्रीय कर्माचरियों की मांग है कि फिटमेंट फेक्टर को 2.57 गुना से बढ़ाकर 3.68 गुना किया जाए. लेकिन, सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय इस मूड में नहीं है. क्योंकि, इससे सरकार पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा. अभी सरकार ग्रोथ को पटरी पर रखना चाहती है. इसलिए 3 गुना से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ सकता है.

निम्न स्तर के कर्मचारियों को होगा फायदा

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, मध्य स्तर के कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि के बजाय निम्न स्तर के कर्मचारियों के ज्यादा तवज्जो दी जा सकती है. इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापक मध्य-स्तरीय कर्मचारियों को ज्यादा वृद्धि नहीं दिखाई देगी, क्योंकि, आय के ध्रुवीकरण के लंबे समय से चलने वाले रुझान और केंद्रीय सरकार के विभागों में सिकुड़ते मध्य स्तर को देखते हुए ऐसा लगता है.

किसे क्या मिलेगा?
  • वो केंद्रीय कर्मचारी जो पे लेवल मैट्रिक्स 1 से 5 के बीच आते हैं
  • न्यूनतम सैलरी 18 हजार के बजाए 21 हजार रुपए दी जा सकती है.
  • कर्मचारी यूनियनों ने 3.68 गुना इजाफे की मांग की थी, जिससे न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए होता है.
  • केंद्र सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा सैलरी बढ़ाने के पक्ष में नहीं है.
  • कर्मचारी यूनियन के मुताबिक, अब तक आए वेतन आयोग में से सातवें वेतन आयोग ने सबसे कम सैलरी बढ़ाने की सिफारिश की है.

आएगा 'ऑटोमैटिक पे रिवीजन सिस्टम'

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में वेतन आयोग को खत्म किया जा सकता है. हालांकि, अभी तक इस पर भी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन, सातवें वेतन आयोग के बाद अगला वेतन आयोग शायद ही आएगा. सरकार इस दिशा में काम कर रही है कि 68 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 52 लाख पेंशन धारकों के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा डीए होने पर सैलरी में ऑटोमैटिक वृद्धि हो जाए. इस व्यवस्था को 'ऑटोमैटिक पे रिविजन सिस्टम' के नाम से शुरू किया जा सकता है.
Source: zeebiz.com 

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