Wednesday, 5 December 2018

नया आयकर कानून : जानें आपको क्या क्या सहूलियत देगा

नया आयकर कानून : जानें आपको क्या क्या सहूलियत देगा

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देशभर के करीब सात करोड़ से अधिक आयकरदाताओं को सहूलियत देने को इसका कानून और सरल होगा. हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. नए कानून का मसौदा तैयार करने वाली समिति के एक सदस्य का कहना है कि ढांचागत बदलाव के बजाए आयकर कानून 1961 को और सरल बनाने की कोशिश होगी.
  • 2019 के आम चुनाव से पहले नए कानून पर लोगो से राय लेगी सरकार 
  • 2017 में भारत सरकार ने टास्क फाॅर्स का गठन किया गया था 
  • 50 साल पुराने आयकर कानून में बदलाव कर सरल बनाने की तैयारी में सरकार 
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चुनाव से पहले पेश होगा मसौदा

मोदी सरकार आयकर कानून का मसौदा आम चुनाव से पहले आम जनता के सामने पेश करना चाहती है. चुनाव से पहले आम जनता की राय इस पर मांगी जाएगी. फिर चुनाव होने के बाद इस कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा. अधिकारी ने बताया कि सरकार को समिति अपना सुझाव 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देगी. डायरेक्ट टैक्स कोड का मसौदा तैयार कर रहे समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है. यह टास्क फोर्स नवंबर 2017 में गठित हुई थी. पैनल को अब 28 फरवरी, 2019 तक रिपोर्ट देनी है.

इसलिए है महत्वपूर्ण बदलाव

प्रत्यक्ष कर कानून में बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार का आधा कर राजस्व इन्हीं के माध्यम से आता है. वित्त वर्ष 2017-18 में आयकर से प्राप्त कर में 18 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 6.56 लाख करोड़ रुपये रही. आयकर कानून को सरल बना सरकार प्रत्यक्ष कर संग्रह को बढ़ाना चाहती है. गौरतलब है कि जीएसटी लागू कर सरकार ने भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव किया. सरकार ने इसे ऐतिहासिक करार दिया था। इसी तरह आयकर को भी सरल किया जाएगा.

आपको होंगे ये फायदे 

जीएसटी लागू होने के बाद ही सरकार आयकर से जुड़े नियमों को आसान बनाना चाहती है. इसका उद्देश्य आयकर दाताओं को सहुलियत देने है. गौरतलब है कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने जटिल आयकर नियमों की जगह लेने के लिए डायरेक्ट टैक्स कोड का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें टैक्स दर को कम रखने और टैक्स छूट खत्म करने की बात कही गई थी.

ये काम पुरे करेंगी समिति 

आयकर कानून पर सुझाव मौजूदा प्रावधानों और क्षेत्रों के विकल्प और उसमें सुधार के बारे में सुझाव देगी, ताकि कर कानून में निश्चितता और भरोसा पैदा किया जा सके. समिति उन प्रावधानों का अध्ययन और पहचान करेगी, जिसके अलग-अलग विश्लेषण से विवाद होता है.

Source: livehindustan


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